बंद करे

पुलिस

दिल्ली पुलिस, दिल्ली के नेशनल कैपिटल टेरिटरी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र) के लिए कानून लागू करने वाली एजेंसी है। नेशनल कैपिटल रीजन (NCR) के आस-पास के इलाकों पर इसका अधिकार क्षेत्र नहीं है।

1946 में दिल्ली पुलिस का पुनर्गठन किया गया और इसकी संख्या लगभग दोगुनी कर दी गई। बंटवारे के बाद बड़ी संख्या में शरणार्थी आए और 1948 में अपराधों में अचानक बढ़ोतरी हुई। 16 फरवरी 1948 को दिल्ली के पहले IGP (इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस) की नियुक्ति हुई और 1951 तक दिल्ली पुलिस की कुल संख्या बढ़कर लगभग 8,000 हो गई, जिसमें एक इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस और आठ सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस शामिल थे। 1956 में डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस का पद बनाया गया। दिल्ली की आबादी बढ़ने के साथ-साथ दिल्ली पुलिस की संख्या भी बढ़ती गई और 1961 में यह 12,000 से ज़्यादा हो गई। अभी दिल्ली पुलिस की स्वीकृत संख्या 83,762 है।

1966 में, भारत सरकार ने दिल्ली पुलिस की समस्याओं की जांच के लिए जस्टिस जी.डी. खोसला की अध्यक्षता में दिल्ली पुलिस आयोग का गठन किया। खोसला आयोग की रिपोर्ट के आधार पर ही दिल्ली पुलिस का फिर से पुनर्गठन किया गया। चार पुलिस जिले बनाए गए – उत्तर, मध्य, दक्षिण और नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस आयोग ने पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू करने की भी सिफारिश की, जिसे आखिरकार 1 जुलाई 1978 से अपना लिया गया।